पहला सबक न कोई होताby राजकुमार

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पहला सबक न कोई होता

राजकुमार,शिक्षक,अमृतसर

एक पिटारा इस जीवन का
मैंने अभी-अभी है खोला..
बीते कल के सब पन्नो को
फिर से मैंने आज फरोला..
पहली सीख वृन्दावन जैसी
मां ने गीता हाथ थमाई..
बोली मुझे ना पढ़ना आता..
अति श्रद्धा से मैंने सुनाई
शायद अम्मी ने इक राह दी
सच्चे जीवन की सलाह दी..
अध्यात्म के पथ पर तोरा
चला था मैं, लेकर मन कोरा..
पहली सीख मेरे अब्बू की
मेहनत से कभी,जी न चुराना
मैंने तुझे हलाल खिलाया..
तू भी सदा हलाल खिलाना..
वो थप्पड़,मुक्के औ’ गाली..
सचमुच वो थी किस्मतवाली
अब्बू की उस उच्च सीख ने
मेरी दुनिया बदल ही डाली
पहली सीख प्रेम की पाई
सारा जीवन दाव लगाया
धरा की सुंदरतम मूरत को
जीवनसाथी रूप में पाया..
पहला सबक प्रेम का बोले
करना है ,पूरा समर्पण
जो जीवन में संग चला है
उसको कर दो सब कुछ अर्पण
पहला सबक विश्वासघात का
जीवन की वो पहली मात का
जिसने अंतर हिला था डाला
दिल के मुंह पर गहरा छाला
इसने दिल का मोल बताया
हर धड़कन अनमोल बताया
पहला सबक इस कर्मयोग का
सुंदरतम से इक संयोग का
सत्य कर्म में सत्य सदाएं
होती सबसे महंगी दुआएं
इतनी बलशाली होती है
मृत्यु से भी छीन के लाएं
पहला सबक समाज सिखाता
नेकी का यह मूल्य न पाता
सत्यकर्म और सत्यराह पे
कांटो की यह सेज बिछाता
नानक को यह पत्थर मारे
जीसस को सूली लटकाता
सत्यपुरुष को रुखस्त करके
बाद में जय-जय कार बुलाता
पहला सबक किसे कहूँ मैं
मेरा पिटारा भरा हुआ है
कुछ पन्ने खामोश,हँस रहे
कोई पन्ना डरा हुआ है
कुछ पन्नो पे मीठी चाश्नी
कुछ पन्नो पे आँसू गिरे हैं
पहले-पहले सबक थे कितने
जिनपर वक्त के हाथ फिरे हैंं
पहले-पहले किसी सबक ने
कितने ही है सबक सिखाए
भोलीभाली सी सूरत पे
कितने ही है नकाब चढ़ाए
अब भी कुछ पन्ने हैं खाली 
जिनपे कोई कलम चलाएगा
कुदरत का फिर से कोई बंदा
पहला सबक सिखा जाएगा

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