अनुभवby Dr Purnima Rai

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अनुभव 

रात के घुप्प अंधेरे में जब हम चाह कर पर कुछ देख नहीं पाते तब मन में अनेक सवाल उत्पन्न होते हैं ।उस वक्त कोई भी वस्तु हमें साफ दिखाई नही देती।जिस बात को हम रोज महसूस करते हैं यां कोई ऐसी अदृश्य सत्ता यां साकार प्रतिमूर्ति जिसे हम अनजाने में भी देखने को लालायित रहते हैं ,वही हमें दिखाई देने लगती है ।अर्थात् हमारी दृष्टि के समक्ष वही रूप, बिम्ब की छवि बनने लगती है ।अगर हमारी भावनाएं ,विचार सात्विक ,निर्मल ,शुद्ध हैं तो वही अंधेरा हमें ज्ञान का साकार रूप जान पड़ता है तब हम अंधेरे से डरते नहीं बल्कि उस पर विजय पा लेते हैं और निश्चिंत हो जाते है ।इसके विपरीत मनोबल के कमजोर होने ,तामसी वृत्तियों के हावी होने पर बुरे,घिनौने,भयावह दृश्य ,बिम्ब ,छवि अंधेरें में और वीभत्स रूप धारण कर दिखाई देने लगते हैं ,तब चाह कर भी हम उजाले की ओर ,सवेर की ओर अग्रसर नही हो पाते।तात्पर्य यह है कि ईश्वर का अस्तित्व कण कण में हैं , हम तब तक उस निराकार सत्ता पर विश्वास नही कर पाते , जब तक हमारा मनोबल सुदृढ़ नहीं होता।कमजोर मानसिकता के कारण हम अंधेरे में तो क्या….उजाले में भी निडर होकर विचरण नहीं कर पाते। ईश्वर,प्रभु,परमात्मा का नाम सुमिरन,भजन,सत्संग… परमार्थ ,सेवाभाव,हृदय की सात्विकता,शुद्धता एवं उच्च विचार का ही दूसरा नाम है।…. एक मुर्शिद एक ही भगवान है धर्म सबका एक ही पहचान है।।……
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डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।

drpurnima01.dpr@gmail.com

 

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