नारी शक्तिby (आशीष पाण्डेय जिद्दी)

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नारी शक्ति

(आशीष पाण्डेय ” जिद्दी “)

नारी परिवार की ,समाज की, देश की, जगत की जननी है, सारे जगत में सबसे महान है, जो ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा रखती है, आज हमारे समाज में उसी नारी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है ।यह चिंतनीय प्रश्न है??
नारी धरती सी सहनशील, गंगा सी पवित्र, पर्वत सी अचल, बरगद की छाँव सी शीतल, सागर की तरह गहरी ,ममता की मूरत है। नारी प्यार, त्याग की महानतम् परिभाषा है, नारी से अधिक धैर्यवान साहसी, त्याग और प्रेम की संसार में कोई दूसरी प्रतिमा नहीं है।
संसार में नारी ही, नर और नारी को जन्म देती है, जिस प्रकार किसी पौधे की उत्पत्ति के लिए बीज को धरती की गोद में समाहित होना पड़ता है, तब पौधा निकलता है धरती से, उसी प्रकार बच्चे की उत्पत्ति के लिए नारी की कोख आवश्यक होती है, लेकिन आज उसी कोख में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण करवाकर यदि बेटी हुई तो गर्भ में ही मरवा दिया जाता है बेटा है तो जन्म देते हैं, खुशियाँ मनाते हैं, बेटी के रूप में जन्म लेकर वह नारी बनती है,पुनः नई पीढी को जन्म देती है पर ये भ्रूण हत्या, बेटी मारना, नारी के अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा है। जब बेटी ही नही होगी तो नारी कहाँ होगी, नारी नहीं होगी तो बच्चे कहाँ से पैदा होंगे और तो और बेटी न चाहने वाले बहू ज़रूर चाहते हैं, पत्नी ज़रूर चाहते है। आज नारी के अस्तित्व पर ज्वलंत खतरा है- बेटी मारना। इस पर गहराई से सोच विचारकर समाधान करना चाहिए, इसका मात्र एक ही विकल्प है– अपने घर से शुरुआत करो –बेटी को बचाने की, जन्म देने की, और सभी को जागरूक करने की, बेटी का,नारी का महत्व समझाते हुए उसकी कमी का एहसास करवाना, उसके बिना जीवन की कल्पना भी शून्य है, यह बात सबको समझाना।
नारी त्याग का रूप है, वह.अपने पति बच्चों के लिए सारे सुख त्याग देती है, बड़ा से बडा त्याग करती है, परिवार के लिए, देश के लिए, समाज के लिए अपने पति को, बेटे को देश पर कुर्बान होने की शिक्षा देकर सरहद पर भेजती हैं।
ममता की खान होती हैं नारियां, अपने बच्चों के अतिरिक्त दूसरे के बच्चों पर भी स्नेह लुटाती हैं। अगर दृढ़ निश्चय कर लिया तो हिमालय पर्वत सी अटल होती हैं, कल्पना चावला, झांसी की रानी, माता सीता, वीरांगना अवंतीबाई, एवं कैकेयी जैसा दृढ़ निश्चय हमारे इतिहास एवं ग्रंथों में भरा पड़ा है। नारी हमारी संस्कृति सभ्यता की परिचायक है, हमारा मान सम्मान है, हमारा गौरव है, जिस दिन हम किसी नारी पर जुल्म करते हैं, जुल्म होते देखते हैं एवं चुप रहते हैं, उस दिन हम सबसे बड़ा पाप करते है।
भ्रूण हत्या महापाप है। इससे बचो।
नारी का सम्मान करो, नारी शक्ति को नमन करो,नारी को सजग – सबल बनाओ, प्रेरित करो कि वह शिक्षित होकर स्वयं अपना,परिवार,समाज ,देश का नाम ऊँचा करे।

आशीष पाण्डेय जिद्दी
9826278837

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