दोहेby डॉ.अरुण श्रीवास्तव “अर्णव”

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रोशन सारा जग हुआअब दिनकर के साथ
नमन सभी को कीजिये ,जोड़े दोनों हाथ 
आओ हम भी बाँट देंअपना सारा ज्ञान
अच्छे कर्मों पर झुके ,यहाँ सभी के माथ ।
भोर सुहानी हो गई ,आशा जगती आज ।
हरियाली का ओढ़ती ,यहाँ प्रकृति भी ताज ।
जीवन को हम भी जियें दिल को अपने खोज
एक दिवस आओ करें ,हम भी खुद पर नाज ।
आओ हम भी बाँट देंअपना सारा ज्ञान
अच्छे कर्मों पर झुके ,यहाँ सभी के माथ ।
तुमसे अब जगने लगी ,इस जीवन को आस ।
आओ दो पल बैठ लो ,आज हमारे पास ।।
जीवन को महका रहा ,सदा आपका नेह ।
जैसे फसलों को मिले ,ज्यों बारिश में मेह ।।
प्रणय जगाता ही रहा ,जीवन भर विश्वास ।
यादों के सँग ही मना ,जीवन में मधुमास ।।
मन को समझे अब जरा ,आशाओं के साथ ।
आज करें अब नेह हित ,सबसे दो दो हाथ ।
डॉ.अरुण श्रीवास्तव “अर्णव”
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1 COMMENT

  1. धन्यवाद डॉ पूर्णिमा जी

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