लेबर मंडी by दीपक कुमार

0
312

लेबर मंडी by दीपक कुमार

दीपक कुमार, हिंदी शिक्षक (जालंधर)
जन्म तिथि –24फरवरी
मो—-9417457642
रूचि -कविता सृजन ,लघुकथा सृजन

 

हम मना रहे मजदूर दिवस
वो खड़ा था लेबर मंडी में!!
अपने और अपने परिवार के
पेट की खातिर
वो खड़ा था लेबर मंडी में!!
माँ का इलाज करवाना है,
बच्चों को आगे पढाना है,
बेटी का भी रचाना है विवाह
इसी सोच में खड़ा था वो
कौन खरीदेगा
आज उसे मंडी में!!
कौन खरीदेगा
आज उसे मंडी में!!

शरीर सूख कर
काँटा हो रहा,
दिन पर दिन उसका
भाव कम हो रहा,
पर कर्ज उतारने हैं,
किश्तें भी मोड़नी है,
इसी लिए फिर
बिकने आ गया है वो मंडी में!!

इतंजार है उसे भी
सुनहरे भविष्य का
पेट की भूख और डर
मकान के बिकने का
हरेक मनुज का है महत्व
इसी भ्रमजाल के भुलावे में
वो आज फिर खड़ा है लेबर मंडी में!!
वो एक बार फिर आज खड़ा है लेबर मंडी में!

 

Loading...
SHARE
Previous articleमज़दूर जिन्दाबादby Manjusha Mann
Next articleदिहाड़ी मजदूरby Pawan jaipuri
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here