मजदूर है मज़बूतby Dr Purnima Rai

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मज़दूर है मजबूत (कविता)

(1मई मजदूर दिवस विशेष)

श्रम धन उसके पास अथाह,
जीवन की उसे न परवाह।।

जगता है सूरज के संग,
थके कभी न अंग-प्रत्यंग।।

गर्मी-सर्दी हो यां धूप,
परिश्रम से ही निखरे रूप।।

छोट़ा-बड़ा न समझे काम,
पल भर भी न करे आराम।।

फटेहाल उसके दिन-रात,
खुशियों की बाँटे सौगात।।

मज़दूर बनाये तीर्थधाम,
बच्चे करते रोशन नाम।।

चाहें कभी नहीं वह भीख,
धैर्य लगन की देता सीख।।

मिले मजदूर को सत्कार,
सुखी “पूर्णिमा” हो संसार।।

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।

drpurnima01.dpr@gmail.com

 

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1 COMMENT

  1. उत्तम रचना सरल शब्दावली मन को छू लेने वाली ।

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