ओस की बूँदें (काव्य संग्रह) का लोकार्पण समारोह (झलकियाँ)

2
248

1*ओस की बूँदें ( डॉ.पूर्णिमा राय) काव्य संग्रह

2*”सुरेन्द्र वर्मा का साहित्य “आलोचना ग्रंथ by Dr purnima Rai

Loading...
SHARE
Previous articleचोका:एक महत्वपूर्ण जापानी काव्य विधा
Next articleसंस्मरण :एक अवलोकन
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

  1. दिल कोई सामां ना हो पाया
    चाहतों की दुकाँ ना हो पाया
    ~
    वो इसलिए मुझे छोड़ गया
    मैं उसकी तरह ना हो पाया
    ~
    झाँक लेते सभी अपना मुक़द्दर
    मुस्तकबिल आईना ना हो पाया
    ~
    उसने खुद्दारी को गुरूर समझा
    मैं चाबी का खिलोना ना हो पाया
    ~
    जिसके जवान बेटे मारे गये
    वह ठीक से बूढ़ा ना हो पाया

    रचनाकार @@@ गौतम कुमार सागर

    • आप की गज़ल बेहतरीन एवं सुंदर विचारों से सज्जित है आप अपना संक्षेप परिचय ,फोटो एवं अन्य तीन चार गजलें.
      drpurnima01.dpr@gmail.com पर भिजवा दीजियेगा….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here