मैं धरती हूँ (अनीला बत्रा)

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मैं धरती हूँ !!


(अनीला बत्रा,शिक्षिका ,जालन्धर)

हे मानव, तेरे अत्याचारों से
ज़रा भी न हिली हूँ।
स्थिर, गम्भीर, शांत आज भी तुझे
आँचल में लेकर खड़ी हूँ।
ख्वाहिशें ज़्यादा नहीं मेरी,
बस अपने पुत्र तरु से बिछुड़ने से डरती हूँ!!
वही तो है संबल मेरा
उसी के सहारे धैर्य से सब सहती हूँ।
मैं धरती हूँ!!

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