पढ़े न उसने ढाई अक्षर (कहमुकरियाँ)

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पढ़े न उसने ढाई अक्षर (कहमुकरियाँ )

नीरजा कमलिनी,गाजियाबाद,दिल्ली

(1)

रूप रंग मनभावन प्यारा

जग में दिखता सबसे न्यारा

जिया चुराये बन चितचोर

ऐ सखि साजन ? ना सखी मोर।

(2)

जोर-जोर से सदा पुकारे

बैठा है वह मेरे द्वारे

बाँध रहा ज्यों प्रीत का धागा

ऐ सखि साजन ? ना सखी कागा।

(3)

पल भर में वो रूठ ही जावे

जब मनावूं मान भी जावे

दिल तो उसका बहुत ही सच्चा

ऐ सखि साजन ? ना सखी बच्चा।

(4)

हरदम रहता मेरे संग

लगा रहे वो मेरे अंग

आवाज़ भी उसकी करती घायल

ऐ सखि साजन ? ना सखी पायल।
(5)

रात में मेरे पास ही डोले

कानों में मिश्री सी घोले

पढ़े न उसने ढाई अक्षर

ऐ सखि साजन ? ना सखी मच्छर

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