आयी फिर से होली रे !!

0
15

*आपको और आपके स्वजनों को होली की अपार शुभकामनाएं*

*एक होली गीत…..*आयी फिर से होली रे

*सात रंग से थाल सजाया, आयी फिर से होली रे।*
*सारे शिकवे गिले भुलायें, होली में हमजोली रे।।*

पीत रंग है मन को भाये, ऋतु बसंत की याद दिलाये।
अमलतास अरु पीली सरसों, धरती का शृंगार कराये।
इक नूतन अनूभूति कराते, गेंदा खिल कर क्यारी क्यारी,
स्वर्णिम आभा दिखे प्रकृति की, मानव मन को अति भाये।
पीली साड़ी और चुनरिया, पे हर नारी डोली रे।
*सात रंग से थाल सजाया, आयी फिर से होली रे।1*

हरियाली से हरा रंग की, शोभा बहुत निराली है।
हरी दूब हरियाले तरुवर, लाते नव खुशियाली है।
दुलहन सी सजती हर नारी, धानी चूनर मन भाये।
फागुनिया लहंगा अरु चोली, पहन बनी नखराली है।
गोरी का मुख दप-दप दमके, मानों चढ़ती डोली रे।
*सात रंग से थाल सजाया, आयी फिर से होली रे।2*

रंग गुलाबी जैसी आभा, झलक रही नारी मुख पर।
नैन लड़ाये पिय से गोरी, लाज नज़र आती मुख पर।
पिय का जब स्पर्श मिले तो, गोरी ऐसे शरमाये।
रंग गुलाबी चढ़ जाता है, उसके सिंदूरी मुख पर।
भर पिचकारी पिय ने मारी, भीगी चुनरी चोली रे।
*सात रंग से थाल सजाया, आयी फिर से होली रे।3*

रंगों की बरसात हो रही, भीगे सब के तन-मन हैं।
हर मुखड़ा है हुआ रँगीला, कुसुमित सबके जीवन हैं।
दहन दुखों का रात हो गया, शेष बची हैं अब खुशियाँ।
बच्चों के मुख आभा दमके, खुशियाँ हर घर आँगन हैं।
पिचकारी में भर-भर कर अब, चले रंग की गोली रे।
*सात रंग से थाल सजाया, आयी फिर से होली रे।4*

*जीवन के अब रंग न छूटें, हरदम खेलें होली रे।*
*जीवन के रस रंग दिखाने, आयी फिर से होली रे।1*

प्रवीण मीनू त्रिपाठी, नयी दिल्ली, 21 मार्च 2019*

Loading...
SHARE
Previous articleसनद रहें ! देश में आम चुनाव है!
Next articleपुनः मुबारक आपको, गुझियों का त्यौहार!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here