बीती बातें सारी भूलो गुल दिल का महकाना कर लो।

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बीती बातें सारी भूलो गुल दिल का महकाना कर लो।

मौसम ख़ास सुहाना कर के बस उसमें सुस्ताना कर लो।
बीती बातें सारी भूलो गुल दिल का महकाना कर लो।

दर्द मिला है फैंको पीछे जुल्फों सा झटका कर देखो
कुट्टी अब्बा में क्या रक्खा हर कोना भर जाना कर लो।

आज नहीं मैं कल आऊँगी झूठे रोज बहाने करती-
दिल सोना सा है तेरा ये इसके खोट हटाना कर लो।

राधे-राधे सुमिरन जप-तप साथी अपना कृष्णा ले कर
दिल पागल मस्ताना लेकर रस्ता खोज खजाना कर लो।

इस श्रद्धा सुमिरन से अपना प्रेम रुहाना कर के दिल का-
दोष गिनो ना केवल जग के अपनी और मुहाना कर लो।

जैसी करनी वैसी भरनी पथ पर शीश झुका कर अपना
छोटी बातों में सुख ढूँढो ग़म को रोज सुहाना कर लो।

प्यार बढाना है आगे तो हर दिल खा़स मना लेना बस
अगली पिछली बाते भूलो या फिर जोड़ घटाना कर लो।

ये भी कर लो वो भी कर लो अपना आप थकाना छोड़ो-
प्रेम की चाहत दिल में पालो ग़म को तोड़ निशाना कर लो।

प्रेम दिवानी बनकर जोगन ग़म का रोज फसाना मत कर-
मन की छोटी सी दुनियाँ से कच्ची नींव हटाना कर लो।

संगीता पाठक

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