किसको मन की व्यथा सुनायें!!

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किसको मन की व्यथा सुनायें

अपनेपन के इस आँगन में ,
चिरयौवन की अद्भुत पीड़ा ।
मन के इस उत्थान पतन का ,
देखें कौन उठाये बीड़ा ।।
अट्टहास के उल्लासों में ,
कैसे गीत विजय के गायें ।
किसको मन की व्यथा सुनायें ।।

जीवन के इस समरांगण में ,
सारे ही तो अतुलित  योद्धधा
शून्य ज्ञान से आलोकित हैं ,
बनते जग में बड़े पुरोधा ।।
जीवनपथ के नये मदारी ,
अपना ही उपहास करायें ।
किसको मन की व्यथा सुनायें ।।

कलमकार की कलम मौन अब ,
भिक्षुक बन सत्ता के द्वारे ।
आश्वासन के बाहुपाश में ,
उलझे साहित्यिक गलियारे ।।
माँ शारद से विनती इतनी ,
इन सबको भी काश जगायें ।
किसको मन की व्यथा सुनायें ।।

 

डॉ अरुण कुमार श्रीवास्तव अर्णव

 

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