मन में धधक उठी है ज्वाला!

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मन में धधक उठी है ज्वाला!

*मन में धधक उठी है ज्वाला,*
*दुश्मन तूने क्या कर डाला।*
*रँगा रक्त में पुनः तिरंगा।*
*उद्वेलित सब को कर डाला।*

_गलत राह तूने है पकड़ी।_
_गर्दन व्यर्थ दम्भ में अकड़ी।_
_गर्दन वही मरोड़ेंगे हम।_
_धूल धूसरित होगी पगड़ी।_
_छलका आज सब्र का प्याला।1_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_हिम्मत तुझ में तनिक नहीं है।_
_ताकत तुझमें अधिक नहीं है।_
_कायरता से हमले करता।_
_सही राह का पथिक नहीं है।_
_माँगों को सूनी कर डाला।2_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_बड़ी बड़ी डींगें तू भरता।_
_पर समक्ष आने से डरता।_
_हश्र पता क्या होगा तेरा।_
_आतंकी तब पैदा करता।_
_और नहीं तू बचने वाला।3_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_बच्चा बच्चा कसम खा रहा।_
_बदले को बेताब हो रहा।_
_शपथ ले रहीं माता-बहनें।_
_तेरा बचना कठिन हो रहा।_
_काल गाल में जाने वाला।4_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_चौतरफा हमला अब होगा।_
_आक्रमण अर्थतंत्र पर होगा।_
_लिये कटोरा घूमेगा तू।_
_सबसे जब प्रतिबंधित होगा।_
_नहीं मिलेगा एक निवाला।5_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_बैरी की करतूतें काली।_
_वार नहीं जाएगा खाली।_
_उनकी छाती छलनी होगी।_
_कर देंगे बंदूकें खाली।_
_मौत बनाये उन्हें निवाला।6_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

_जितने बम हैं पास तुम्हारे।_
_ज्यादा उससे पास हमारे।_
_थोड़ी हानि हमें भी होगी।_
_कोई युद्ध नहीं हम हारे।_
_ईश्वर अपना है रखवाला।7_
*मन में धधक उठी है ज्वाला…*

*फिर से तांडव होने वाला।*
*तभी बुझेगी मन की ज्वाला।*

*प्रवीण त्रिपाठी, नई दिल्ली, 18 फरवरी 2019*

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