माँ तेरे बेटे ने वक्षस्थल पर गोली खाई है!

0
60

*माँ तेरे बेटे ने वक्षस्थल पर गोली खाई है*
(एक शहीद का अंतिम पत्र )
सुशील शर्मा

*माँ के लिए*

अपने शोणित से माँ ये अंतिम पत्र तुझे अर्पित है।
माँ भारती के चरणों में माँ ये शीश समर्पित है।
माँ रणभूमि में पुत्र तुम्हारा आज जमीं पर लेटा है।
अंतिम पथ पर जाने वाला आज तुम्हारा बेटा है।
शत्रु के सीने पर पैर जमा मैं खूब लड़ा हूँ।
सीने में हैं धसीं गोलियां हाथ तिरंगा लिये खड़ा हूँ।
आज न जाने क्यों मुझको तेरी याद सताई है।
माँ तेरे बेटे ने अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

कहा था माँ तूने पीठ पे गोली मत खाना।
शत्रु दमन से पहले घर वापस मत आ जाना।
सौ के सीने में मैंने गोली आज उतारी है।
माँ तेरे बेटे ने सिंहों की करी सवारी है।
भारत माँ की रक्षा कर तेरे दूध की लाज बचाई है।
माँ तेरे बेटे ने अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

मातृभूमि की धूल लपेटे तेरा पुत्र शत्रु पर भारी है।
रक्त की होली खेल शत्रु की पूरी सेना मारी है।
वक्षस्थल मेरा छलनी है लहू लुहां में लेटा हूँ।
गर्व मुझे तुझ पर है माता, मैं सिंहनी का बेटा हूँ।
मत रोना तू मौत पे मेरी, तू शेर की माई है।
माँ तेरे बेटे ने अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*पिता के लिये*

पिता आज गर्वित होंगें, अपने बेटे की गाथा पर।
रक्त तिलक जब देखेंगे वो,अपने पुत्र के माथा पर।
उनसे कहना मौत पे मेरी, आँखें नम न हो पाएं।
स्मृत करके पुत्र की यादें, आंसू पलक न ढलकाएं।
अब भी उनके पास में हूँ, तन की महज विदाई है।
माँ तेरे बेटे ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*पत्नी के लिए*

उससे कहना धैर्य न खोये, है नहीं अभागन वो ।
दे सिन्दूर माँ भारती को, बनी है सदा सुहागन वो।
कहना उससे अश्रुसिंचित कर न आँख भिगोये वो।
अगले जनम में फिर मिलेंगें, मेरी बाट संजोये वो।
श्रृंगारों के सावन में, मिलेंगें जहाँ अमराई है।
माँ तेरे बेटे ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*भाई के लिये*

स्मृतियों के पदचाप अनुज मेरे अंतर में अंकित हैं।
स्नेहशिक्त तेरा चेहरा, क्या देखूंगा मन शंकित है।
ह्रदय भले ही बिंधा है मेरा, रुधिर मगर ये तेरा है।
अगले जनम तू होगा सहोदर, पक्का वादा मेरा है।
तुम न रहोगे साथ में मेरे, कैसी ये तन्हाई है।
तेरे भाई ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*बहिन के लिये*

बहिन नहीं तू बेटी मेरी, किस को राखी बांधेगी।
भैया भैया चिल्लाकर, कैसे तू अब नाचेगी।
सोचा था काँधे पर डोली रख तेरी विदा कराऊंगा।
माथे तिलक लगा, इस सावन राखी बँधवाऊंगा।
बहना तू बिलकुल मत रोना, तू मेरे ह्रदय समाई है।
तेरे भाई ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*बेटी के लिये*

पापा पापा कह कर जो, मेरे काँधे चढ़ जाती थी।
प्यार भरी लोरी सुन कर, वो गोदी में सो जाती थी।
कल जब तिरंगें में, उसके पापा लिपटे आएंगे।
कहना उससे पापा उसको परियों के देश घुमाएंगे।
उसको सदा खुश रखना, वो मेरी परछाँई है।
परी के पापा ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*अंतिम प्रणाम*

माँ भारती के भाल पर, रक्त तिलक चढ़ाता हूँ।
अंतिम प्रणाम सबको महाप्रयाण पर जाता हूँ।
तेरी कोख में फिर आऊंगा, अंतिम नहीं विदाई है।
माँ तेरे बेटे ने, अपने वक्षस्थल पर गोली खाई है।

*गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

Loading...
SHARE
Previous articleविद्रोह के पथ पर ‘यायावर गणतंत्र’!! Republic Day2019
Next article🇮🇳सुनो तिरंगा क्या कहता है🇮🇳 70 वे गणतंत्र दिवस को सलाम
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here