इस धरती पर यदा कदा ही, वीर जन्म लेते हैं!

1
77

इस धरती पर यदा कदा ही, वीर जन्म लेते हैं।

इस धरती पर यदा कदा ही, वीर जन्म लेते हैं।
मातृभूमि के लिए सदा ही, वो जीते मरते हैं।1

नेताजी सुभाष के जैसे, विरले ही हो पाते हैं।
पराधीनता दूर भगाने, अपना शीश चढ़ाते हैं।2

शौर्य और साहस अदम्य अरु, रणनीतिक चतुराई।
अपने कौशल के बल बूते, सेना एक बनाई।3

अलख जगाने आज़ादी की, वह सबसे थे आगे।
अंग्रेजों को धता बता कर, छद्म वेश में भागे।

अंग्रेजों के जो दुश्मन थे, उनको था उकसाया ।
अंडमान को अंग्रेजों के, चंगुल से छुड़वाया।5

भारत को स्वाधीन कराना, उनका लक्ष्य बड़ा था।
नींव रखी थी जो सुभाष ने, उसका लाभ मिला था।6

भूल न सकते भारत वासी, अपने नेता जी को।
इसीलिये हर साल इसी दिन, करते याद उन्हीं को।7

*प्रवीण त्रिपाठी, नई दिल्ली,

Loading...
SHARE
Previous articleतुम मुझे खून दो,मै तुम्हें आज़ादी दूंगा !
Next articleविद्रोह के पथ पर ‘यायावर गणतंत्र’!! Republic Day2019
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

  1. Tripathi sir ki sabhi rachanye behetarinhi rahti hai. Bhagvan unhe lambi ayu, Aishwarya, Yash, kirti pradan Kare. Hariom

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here