तुम मुझे खून दो,मै तुम्हें आज़ादी दूंगा !

0
17

तुम मुझे खून दो..मै तुम्हे आज़ादी दूंगा
(नेता जी को छोटा सा नमन,जरूर पढ़िए)

किसी नौजवान को उसका वकील पिता एक ताना देता है कि तेरे में इतनी काबलियत नही कि तू किसी उच्च ओहदे तक पहुंच सके…बात नौजवान के दिल को लगती है और वह अपनी योग्यता के बल पर इंग्लैंड में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला पाता है… आई सी एस की परीक्षा देता है और पहला भारतीय बनता है जो अंग्रजों को उन्ही के देश मे पछाड़ते हुए टॉप रैंक में चौथे स्थान पे आता है…1920 की बात थी यह..सिविल सर्विस में चौथा स्थान पाना.. वो भी अंग्रेजी मीडियम में और अंग्रेजी धरती पे…और एक गुलाम देश का वासी होकर…लेकिन सिर्फ पिता के ताने पे इस लड़के ने केवल 7 महीने की मेहनत से यह परीक्षा पास की जिसे पास करने के लिए अंग्रेज साढ़े चार साल लगाते थे…लड़का कलेक्टर के पद को लात मारकर देश वापस आता है,क्योंकि उसके खून में देशभक्ति है…पिता को दिल का दौरा पड़ जाता है…लेकिन देश इस लड़के को सर आंखों पे उठा लेता है..और यह लड़का देश की आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़ता है…गांधी के प्रति श्रद्धा तो रखता है लेकिन जल्दी ही वह गांधीवाद के विपरीत बोलने लगता है और 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर विराजमान होता है…1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद इसने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। यह नीति गाँधीवादी आर्थिक विचारों के अनुकूल नहीं थी। 1939 में पुन एक गाँधीवादी प्रतिद्वंदी को हराकर विजयी हुआ । गांधी ने इसे अपनी हार के रुप में लिया। उसके अध्यक्ष चुने जाने पर गांधी जी ने कहा कि यह मेरी हार है…इतना स्वाभिमानी था यह नौजवान कि यह कांग्रेस अध्य्क्ष पद से अस्तीफा देकर देश से बाहर अंग्रेजों के दुश्मनों की सहायता प्राप्त करने लिए जर्मनी जाता है…हिटलर जैसे उस जर्मन नेता से मिलता है जिससे अंग्रेज और दुनिया खौफ खाते है…हिटलर इससे इतना प्रभावित हुआ कि उसने इस नौजवान को फ़्यूरेर कह कर बुलाया… जिसका अर्थ था..”नेताओं का नेता “….वाकई हिटलर ने सच कहा था…नेताओं का नेता..इसमें इतना दम था कि इसने 21 oct 1943 को इंडियन नेशनल गवर्नमेंट की स्थापना कर दी…वो भी देश के बाहर..और इसे 9 देशों की मान्यता भी मिल गयी…यही बस नही हुई …इसने एक फौज तैयार की..जिसे हम आजाद हिंद फौज के नाम से जानते है…यह वो फौज थी जिसने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए थे..केवल पुरषों की ही नही बल्कि औरतों की भी एक आर्मी बनाई गई ,नाम था “रानी लक्ष्मी बाई रेजिमेंट..यही नही बच्चों की भी आर्मी बनाई थी जिसे “नौजवान बाल सेना” का नाम दिया गया…यही नही इस सेना में 3 जनरल बनाए..नाम थे शाहनवाज़ हुसैन,गुरबख्श सिंह ढिल्लों और P. K सहगल…जरा गौर करें..कितनी गहरी और उच्च सोच थी इस नौजवान की…वो यह कि सच्चा धर्म निरपेक्ष देश पैदा करना….फिर एक नारा दिया “दिल्ली चलो”..इस नारे का अर्थ था कि जागे हुए और वीर लोग अब इक्कठे चलेंगे और अपने देश की राजधानी पे अपना कब्जा करेंगे…
दोस्तो ! आपको पता चल ही गया होगा कि बात उस महानतम नेता की हो रही है जिसे सभी नेताजी या सुभाष चन्द्र बोस कहकर बुलाते हैं..नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम ‘जानकीनाथ बोस’ और माँ का नाम ‘प्रभावती’ था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे।
सुभाष चन्द्र बोस का अंत बेहद रहस्यमयी था..कहते है कि 18 aug 1945 को उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उनकी जलने से मृत्यु हो गयी थी…यह पुष्टि जापान सरकार करती है क्योंकि जापान की मदद से सुभाष आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे और जापान और मित्र सेनाओं द्वारा हार स्वीकार कर लेने पर अमेरिका ने सुभाष को मरवा दिया था….दूसरा रहस्य यह था कि वह मरे नही थे बल्कि उन्हें कैद करके रूस मे नज़रबन्द कर दिया गया था और इसमें भारत के कुछ उच्च नेताओं का हाथ था…यही बात इनका परिवार भी कहता है…तीसरी बात है कि वह उत्तरप्रदेश के किसी शहर में एक गुमनामी बाबा जिसे कि लोग भगवान बाबा कह कर बुलाते है..वह सुभाष चन्द्र बोस थे जिनकी कि 1985 मे मृत्यु हुई…
सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की। उन दोनों की एक अनीता नाम की एक बेटी भी हुई जो वर्तमान में जर्मनी में सपरिवार रहती हैं।….दोस्तो ! जब देश आजाद हुआ था तो गांधी ने एक बात कही थी कि अगर सुभाष होता तो देश का बंटवारा न होता..यह सच था क्योंकि वह ह्रदय से देधभक्त था..वह पूर्ण स्वराज्य चाहता था ,तभी तो उसकी आज़ाद हिंद फौज के जरनैल हिन्दू,सिख और मुसलमान थे…यही नही आज़ाद हिंद फौज में हिंदुओं से ज्यादा मुसलमान थे..और खास बात यह रही कि आज़ाद हिंद फौज के जो सैनिक पाकिस्तान गए थे उन्हें सम्मान सहित सेना में पहल के आधार पर सेना में रखा गया जबकि भारत में इन सैनिकों को भर्ती तो दूर बल्कि देशद्रोही कह कर अपमानित किया गया..दोस्तो ! देश भक्ति भाषणों में नही,खून में होती है…रगों में दौड़ती है.. यह षड्यंत्र नही खेलती बल्कि कुर्बान हो जाती है..
“भगत सिंह और सुभाष में एक सांझी बात यह थी कि दोनों में देशभक्ति का अंधा जुनून था..दोनों ही स्वराज्य के हामी थे..दोनों ही केवल अंग्रेज ही नही बल्कि उनकी आत्मा को देश से निकाल कर बाहर कर देना चाहते थे ..लेकिन अफसोस दोनों ही कुर्बान हो गए.. हमने केवल गोरे जिस्म देश से बाहर भेजे..परन्तु उनकी काली आत्मा को अपने ह्रदय में बसाए रखा ..नतीजा सामने है…72 साल में हमने धरती पे अथाह जनसंख्या अथाह भूख़ अथाह गरीबी अथाह अनपढ़ता,अंधविश्वास,बेरोजगारी और भ्र्ष्टाचार को जन्म दिया है….आज तो हमे यह भी याद नही कि एक ऐसा नेता पैदा हुआ था जो अति ज़हीन था और उसने 1943 में 33 करोड़ की आबादी के लिए उच्चकोटि का नीतिनिर्माण कर रखा था.. यह वो व्यक्ति था जिसने उच्चकोटि का कलेक्टर का ओहदा छोड़कर सिंगापुर में किसी गन्दे छप्पड़ का पानी भी पिया था… किसके लिए ?? एक ऐसे देश के लिए जिसके वासी गरीब थे,अनपड़ थे और मासूम थे.. लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि पहले इन्हें गैरों ने लूटा और अभी तक अपने लूट रहे है.स्वयं भी जाग जायेें  और दूूूसरों  को भी जगाएं…

राजकुमार

 

Loading...
SHARE
Previous articleआज तन्हा हूँ मगर तन्हाई का डर नहीं by Dr.Purnima Rai
Next articleइस धरती पर यदा कदा ही, वीर जन्म लेते हैं!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here