मेरी सखियाँ!!

4
81

मेरी सखियाँ

पँछी करते हैं चहल-पहल
राहो में होती है हलचल
बाग-बगीचे और फूलो की कलियाँ खिल जाती हैं
जब मेरी सखियाँ मिल जाती हैं
नये-नये से वस्त्र पहनकर
हम सब मेले में जाती हैं
अपनी-अपनी कर तारीफ़े सबको यूँही चिडाती हैं
इस दुनिया की सारी खुशियाँ हमको ऐसी
ही मिल जाती हैं

एक रोज की सुनो कहानी
राहो में मिल गई बूढी नानी
बाल खुले और उल्टे पैर
उस रोज नहीं थी सबकी खैर
देखके उसका रूप भयंकर
सारी सहेली हिल जाती हैं

पँछी करते हैं…….

पूरा दिन करते हैं घर का काम
ना ही मिल पाता है हमको आराम
खुशियो में हम झूम हैं उठते
वसुधा अम्बर को चूम हैं उठते
जब सारी सखियाँ मिल जाती हैं

पँछी करते हैं चहल-पहल ……….

भाइयो का अभिमान बने हम
माँ-बाप की पहचान बने हम
जो करेगा आदर उसका सम्मान करेंगी
हम बनके झाँसी की रानी नया उत्थान करेंगी

पँछी करते हैं चहल-पहल …………..

संक्षिप्त परिचय :

नाम – शशि कान्त पाराशर
कार्य – अध्यापक, कवि
विधा – नारी प्रधान कवितायें
निवास – मथुरा, उत्तरप्रदेश
गृह निवास – अलवर , राजस्थान

सम्पर्क सूत्र – 9760765208

ई-मेल : skparashar7466@gmail.com

 

Loading...
SHARE
Previous articleदिल की बात by Dr.Purnima Rai
Next articleयुवा देश का भाग्य बना दो (विवेकानंद जयंती पर विशेष)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here