तन्हा कवि: प्रमोद सनाढ्य

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तन्हा कवि 

प्रमोद सनाढ्य”प्रमोद”
नाथद्वारा

-कवि की पावन लेखनी
लिखती मन की बात,
तन्हाई की वेदना
और विरह की रात।

-तन्हाई से बातें करती
महफ़िल बीच उदास
नीर नयन से झर रहे
रहती फिर भी प्यास

-दिल की बाजी हार कर
लिखे प्रीत की जीत
गीत में अमृत घोल दे
ये कवि मन की रीत।

-संवेदन की सारथी
जज़बातों में खोय,
तन्हाई में बैठ कर
अश्रुन् कलम भिगोय।

प्रमोद सनाढ्य”प्रमोद”
नाथद्वारा

 

 

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