दिल की बात by Dr.Purnima Rai

0
20

दिल की बात (हाइकु )by Dr.Purnima Rai

1)
खुशबू फूलों की
मन की बगिया को
करे सुगंधित!

2)
महका मन
खिला अंग प्रत्यंग
सजी धरती

3)
निशां रेत पे
सूचक हैं आहट के
थमा सा वक्त

4)
माथा चूमती
सुनहली सी धूप
नवल सांझ

5)
सर्द आमद
खिला हुआ है चांद
पिघला सूर्य

6)
तेरी आगोश
सुकूं का अहसास
सिमटा दर्द

7)
चुप सी रात
खिड़कियाँ बोलती
दिल की बात!!

डॉ.पूर्णिमा राय
www.achintsahitya.com
drpurnima01.dpr@gmail.com

Loading...
SHARE
Previous articleउठो सपूत राष्ट्र के, जगा रही तुम्हें धरा।
Next articleमेरी सखियाँ!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here