प्रश्न हमारा है यह तुमसे ,क्या हम फिर से मिल पायेगें।।

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प्रश्न हमारा है यह तुमसे ,क्या हम फिर से मिल पायेगें।।

भूल गए हम लिखना तुमको, तुम हमको ही भूल गए ।
डालों की है व्यथा झलकती झर उनके सब फूल गये।।
साथ तुम्हारे हर पल हमको, नया नया सा लगता था।।
हम तुम ही दुनिया में बाकी ,धुआं -धुआं सा लगता था।।

क्या उपवन में फूल नए फिर नये साल में खिल पाएंगे।
प्रश्न हमारा है यह तुमसे ,क्या हम फिरसे मिल पायेंगे।।

हम मर जाते बस जीवित है ,तुमसे मिलने की आशा में।।
सपने सारे टूट चुके हैं ,ऐसी झूठी अभिलाषा में।।
तुमसे ही करनी हैं बातें ,औरों की स्वीकार न करना ।।
कितना भी तुम व्यस्त रहो पर और किसी से प्यार न करना।।
आँखों से आँसू कम होंगे,जब अपनी मंजिल पायेंगें ।।
प्रश्न हमारा यह है तुमसे ,क्या हम फिर से मिल पायेंगे।।

शोभित सूर्य

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