सबक ,सबब से मिलते हैं!

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सबक ,सबब से मिलते हैं!

दोस्तो ! एक ऐसी घटना आपसे सांझी करने जा रहा हूं जो कि दिल को छूने वाली है..कृपया अपनी सहमति या असहमति पर विचार जरूर देने का प्रयास कीजियेगा…
परसों पंचायत समिति के चुनाव में मेरी ड्यूटी presiding officer के तौर पे जिस booth पे आई,वह विकसित हो रहा वृद्ध आश्रम था और वहां रोटरी क्लब की ओर से फिजियोथेरेपी प्रक्रिया के तहत बहुत महंगी और शानदार मशीने रखी हुई थी..जिनमे शारीरिक व्यायाम के लिए भी कुछेक मशीने थी…रात गहरा रही थी और ठंड का प्रकोप बढ़ रहा था..अगले दिन होने वाली पोलिंग के लिए सारा सामान लिए मैं जैसे ही अपने साथियों सहित उस बड़े हाल कमरे में पहुंचा तो वहां एक मशीन पे एक पुलिस के नौजवान को एक्सरसाइज करते पाया..ये लोग हमसे कुछ पहले यहां पहुंच गए थे और इन्होंने यहां सारी टीम के सोने और अच्छे ढंग से रहने का इंतज़ाम कर दिया था…उस एक्सरसाइज कर रहे पुलिस के नौजवान से मेरा पहला प्रश्न था कि…आप स्पोर्ट्स पर्सन हो…वह केवल मुस्कुरा दिया और उसने कोई जवाब नही दिया…मैंने और मेरे साथ मेरे asst presiding officer जो कि मेरी तरह एक अध्यापक था..हम दोनों ने चुनावी समान और जरूरी कागजात को देखना परखना और व्यवस्थित करना शुरू किया…कोई आधे घण्टे बाद इलाके के लोग खाना लेकर आ गए…वक्त यही करीब 8 बजे का हो चुका था,इसके बाद हमने चाय मांगी और कड़ाके की सर्दी में हमारे लिए चाय भी आ गयी थी…हम और पुलिस पार्टी के लोग आपस में काफी घुलमिल गए थे..ईश्वर की इतनी कृपा थी कि हम सभी सात्विक थे और मास-मदिरा से रहित व्यक्ति थे…
संदीप नाम था उस पुलिस वाले नौजवान का..चाय पीते हुए हम सभी ने अपनी अपनी निजी जिंदगी को थोड़ा थोड़ा खोलना शुरू किया था..संदीप के लिए विशेष तौर पे उसके कहने पर दूध भेजा गया था…समय के साथ साथ बातें खुली..और बातों के साथ साथ संदीप भी खुलता गया..मुझे पहला झटका तब लगा जब संदीप ने अपनी उम्र बताई..वह मेरी उम्र का था,लेकिन कम से कम अपनी उम्र से 12 साल छोटा दिखाई पड़ रहा था…शुद्ध शाकाहारी संदीप ने बताया कि पिछले 35 बरस से उसने कभी चाय नही पी,केवल दूध पिया है..जब उसने अपने मोबाइल पे अपनी तस्वीरें दिखाई तो हम दंग रह गए थे..वह उच्चकोटि का बॉडी-बिल्डर था और अभी भी हर रोज वह कम से कम 20 किलोमीटर साईकलिंग करता है और नियमित कड़ा व्यायाम करता है..उसने कहा कि weight lifting और व्यायाम उसका passion है..यही बस नही..वह अति सूझवान और फिल्मों का भी अच्छा जानकर था..लगभग 1 घण्टे की बातचीत के बाद मैं और मेरा अध्यापक साथी सुखदेव जब बिस्तर पर लेटे तो सुखदेव ने बेहद संजीदगी से मुझे कहा..राज भाजी.. संदीप वाकई शारीरिक मापदण्डो को पूरा करता पुलिस कर्मचारी है…उसने कहा कि उसे ख़ुशी है कि उसे एक ऐसा इंसान मिला है जिसने उसे एहसास दिलाया है कि स्वस्थ जीवन कितना मूल्यवान होता है…अगर उसकी duty यहां नही लगती तो शायद वह एक ऐसे व्यक्ति से नही मिल पाता जिसने कि उसे इतना inspire करना था..उसने कहा कि हम अक्सर शराब पीकर बेहोश हो जाते है और शरीर खोखला कर बैठते है..चाय पीकर सेहत खराब करते हैं..लेकिन संदीप की इन बातों ,निरोगी और कसे शरीर तथा चमकते चेहरे को देखकर मुझे इस बात का अहसास हुआ है कि हमें सबसे पहले अपने शरीर पर विशेष ध्यान देना चाहिए…मैं सुखदेव को एक नज़र देखकर केवल हौले से मुस्कुरा दिया था…..दोस्तो ! अध्यापक वह नही होता,जो एक अदद डिग्री लेकर किसी स्कूल या कॉलेज में शिक्षा देता है..बल्कि अध्यापक हर वह व्यक्ति है ,जो कि हमारी सोच को नई दिशा दे जाता है…संदीप भी इस घटना में एक अध्यापक की तरह मेरी और सुखदेव की ज़िंदगी से होकर गुजरा है..मैंने उसके passion को सलाम किया और सुखदेव जैसे छोटी उम्र के नौजवान ने उससे अमूल्य सीख ली…कल अचानक मैंने सुखदेव का watsup status पढ़ा…बेहद खुशी हुई,एक पुलिस वाले का status नही था वह..किसी दार्शनिक की सूझ के दर्शन थे…लिखा था
“हम से मैं पर आते ही अहंकार शुरू हो जाता है..और मै से हम पर आते ही विकास और प्रगति का पथ खुलने लगता है ”
जीवन रहस्यमयी है..कहीं भी किसी भी मोड़ पे सबसे प्यारी शिक्षा किताबों से नही बल्कि इत्फ़ाक से मिलती है…याद रहे,सबक..सबब से मिलते हैं…”राज”

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