गीत मेरे झर रहे !!

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गीत मेरे झर रहे
सुशील शर्मा

गीत मेरे झर रहे,
प्रीत के मधुमास में।
स्वप्न से संवर रहे,
आस के आकाश में।

दीप एक जल रहा।
प्रीत में पिघल रहा।
पीत पुष्प खिल गए
मीत प्रीत मिल गए।
नयन अश्रु भर रहे।
पिय मिलन की आस में।
गीत मेरे झर रहे,
प्रीत के मधुमास में।

शब्द मुखर हो गए।
भाव प्रखर हो गए।
गीत मधुर बन गए।
प्रेम भवन तन गए।
मन गुलाब खिल रहे,
तेरे तन के पास में।
गीत मेरे झर रहे,
प्रीत के मधुमास में।

फिर एक हवा चली।
बिखर गई कली कली।
बिछड़ गए सपन सदा।
चाँद दर्द से लदा।
हृदय पीर से भरे।
विरह के आवास में।
गीत मेरे झर रहे।
प्रीत के मधुमास में।

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