समय बड़ा बलवान (नीरजा मेहता)

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समय बड़ा बलवान
नीरजा’कमलिनी’,
सेवानिवृत्त शिक्षिका एवं कवयित्री 
(गाजियाबाद)
टिक-टिक करती चलती जाती
बिना रुके ये बढ़ती जाती
छूट रहे हैं कितने काम
जल्दी से निपटा लो काम
रखो समय का हरदम ध्यान
है समय बड़ा बलवान।
पहचानो तुम इसका मोल
न समझे तो डिब्बा गोल
कर लो इसका सदुपयोग
व्यर्थ करो न दुरुपयोग
पालन करे,जो उसकी शान
है समय बड़ा बलवान।
ये जीवन का वो सिक्का है
पकड़ा जिसने वो इक्का है
साथ चलोगे सुख पाओगे
बीत गया तो हाथ मलोगे
न जीता इससे पहलवान
है समय बड़ा बलवान।
इसका आदि है न अंत
समय का पहिया है अनंत
जीवन-मरण भी इसके हाथ
हार जीत भी इसके साथ
आधीन इसके,भूत भविष्य वर्तमान
है समय बड़ा बलवान।
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