भीगते नैन (हाइकु) by Dr.Purnima Rai

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भीगते नैन (हाइकु) by Dr.Purnima Rai

दूरी तुम्हारी
छटपटाये रूह
रूठती साँसें!

भीगते नैन
पल-पल स्वयं ही
ओस के मोती !

खुशी के लिये
न्योछावर कर दूँ
सारी प्रकृति!

चैन की बंसी
तुम्हारे बिना अब
न सुन पाऊँ !

कभी जागती
कभी सोती हैं आँखें
राह निहारे!

सर्द हवाएँ
ठहरी कुदरत
तपते दिल!

जुदा न होते
होते हैं जो अपने
बुने सपने!!

डॉ पूर्णिमा राय
25/12/18

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