देख !दिसम्बर जाता है !

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देख !दिसम्बर जाता है !

कुछ पल मीठी सुधियों वाले !
कुछ पल ..जैसे चुभते छाले !
खट्टे -मीठे सभी पलों को ,
संग बाँधकर लाता है !
देख !दिसम्बर जाता है !

जाने कितने पल हैं भीतर !
और समय के छल हैं भीतर !
सुख -दुख एकाकार हो गये !
जल की बहती धार हो गये !

तेज़ समय की धारा के संग ,
हर मौसम बह जाता है !
देख !दिसम्बर जाता है !

कुछ ने है आभार जताया !
कुछ ने ताने मारे हैं !
और दिसम्बर ने भी हँसकर ,
सब देयक स्वीकारे हैं !

जो है ,जैसा भी है सबको –
हँसकर गले लगाता है !
देख !दिसम्बर जाता है !

क्या कहता है माह दिसम्बर ,
विस्तृत कर लो मन का अम्बर !
धीरज कभी नहीँ तुम खोना ,
चाहे कितने आयें बवंडर !

शीतलता तुम भीतर रखना ,
बात यही समझाता है !
देख दिसंबर जाता है !

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी “शशी ”
जी .जी .एच .एस .एस .बाँगीधार
सल्ट ,अल्मोडा (उत्तराखंड )

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