अनसुनी कहानी भिखारी ठाकुर!!

1
39

#अनसुनी_कहानी_भिखारी_ठाकुर……

27 मई 1964 के दिन जैतपुर गाँव में बहुते हलचल रहे। लईकन लईकन के मुँह से ईहे निकले आज भिखारी ठाकुर के नाच देखे के मिली। सिंह जी के भाई के बरात रहे ओही में भिखारी ठाकुर जी के नाच के साटा बन्हाईल रहे। सिंह जी के चार गाँव में चलती चलत रहे। सिंह जी बहुते दबंग आदमी रले।
कुछ देर बाद में दूल्हा के नहवा देहल गईल। दुआरा पर भिखारी ठाकुर जी के प्रोग्राम चालू हो गईल। लोग एकदम टुट गईल नाच देखे खातिर। बहुते लोग खुश भईल नाच देख के। अब बारात निकले लागल। लोग कहत फिरे वाह माजा आ गईल नाच देख के।
परछावन हो गईल बरात लइकी वाला के दुआरा पहुँचल गईल। लइकी वाला भी बहुते जबरदस्त स्वागत कइले। जवना गाँव मे बारात जात रहे ऊ गाँव के भी लोग बहुते खुश रहे की पहिली बार भिखारी ठाकुर जी के नाच ऊ गाँव में गइल रहे। स्टेज त जबरदस्त सजल रहे, लोग जल्दी-जल्दी खाना खाके स्टेज के आगे बईठे के चालू कर देले, तबले गाँव के नवछेरीया चिल्लाये लगले “नाच चालू करऽ भाई जल्दी।” सिंह साहेब कुर्सी लगा के पूरा बबुआन के साथ बईठ गईले। सिंह साहेब आपन एगो मुंशी से खबर भेजवाईले” कि जाके भिखारी ठाकुर जी से कहऽ की जल्दी से प्रोग्राम चालू करस।” मुंशी जी एकदम वापस हाफत आवात बारे “ऐ हमराज भिखारी ठाकुर त कहत बारे कि हम ईहा अब नाच ना करेम।” ई बात पर त सिंह जी के गुस्सा सतवा आसमान पर पहुंच गईल। सिंह खिसियाईल दौङत भिखारी ठाकुर जी के पास गईले- “का हो तू काहे कहत बारऽ कि हम अब प्रोग्राम पेश ना करेम, साटा बन्हे के समय ना बुझाईल, हमार ईज्जत बा कि ना ईहा, एतना खर्जा काके ई स्टेज बनाल बा आउर तहरा का बीच पड़ गईल की कहत बऽ की हम प्रोग्राम ना करेम। ”
भिखारी ठाकुर जी एकदम शांत मिजाज में जबाब देनी- “देखी सिंह साहेब राउर इज्जत और प्रतिष्ठा के पूरा ख्याल बा बाकी बात ई बा कि हम अभी थोड़े देर पहिले रेडियो के माध्यम से सुननी हवे कि माननीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु जी के देहांत हो गईल एह से हम नाच गान ना करेम, देश में ई समय शोक मन रहल बा हम नाच गान करी ई सिंह साहेब शोभा नईखे देत।” सिंह साहेब से पहिले उनकर मुंशी जी बोल पड़ले- “ठिक बा त साटा के एगो पईसा भी ना भेंटी।”
भिखारी ठाकुर जी बहुत शांत मिजाज में बोलनी- “मुंशी जी अगर राउवा कहेम त हम बायना वाला भी पईसा लौटा देम, बाकी हम प्रोग्राम ना करेम।” सिंह जी ई बात के बाद कुछ ना बोलले और भिखारी ठाकुर जी के पूरा मंडली ओही रात के बारात से वापस आ गईल।

जियाउल हक
(काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित)
जैतपुर सारण बिहार
( नोट- साहित्य समाचार पर प्रकाशित।)

Loading...
SHARE
Previous articleमुहब्बत का सबक !!
Next articleख़ामोश नदी!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here