मायके का शहर !!

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मायके का शहर 

क्या मिसाल दूँ मैं अब इस शहर के लिए
हर शब्द बेमानी हुआ इस नगर के लिए

हर भाव हर विचार तो ससुराल बन गया
कुछ नहीं बचा है अब नेहर के लिए

तमाम उम्र हो गई उनका घर बसाने में
एक पल नहीं मिला अपने घर के लिए

यूँ हुए पराए सब कि चिठिया न पाती
तरसते रहे हैं हम इक नज़र के लिए

मेहताब से उड़े थे हम भी आसमान में
अब तो पिंजरा भला टूटे पर के लिए

डोलता रहा था मन छत की मुंडेर पर
पर न पाँव उठ सके इस डगर के लिए

वो आले की गुड़िया वो पीपल की छैंया
छोड़ना पड़ा सभी हमसफर के लिए
_________
डाॅ   कमलेश मलिक

 

जन्म : 3 अगस्त 1945, गांव अकड़ौली, हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी एवं संस्कृत) पी- एच.डी.
छोटूराम आर्य काॅलेज, सोनीपत में 26 वर्ष तक हिन्दी- संस्कृत विभाग में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत, तदुपरांत टीकाराम गर्ल्स कॉलेज, सोनीपत के प्राचार्या पद से 2004 में सेवानिवृत्त ।सम्प्रति स्वतंत्र लेखन । प्रमुख पत्र- पत्रिकाओं में कहानियाँ, लघुकथाएँ, कविताएँ,गीत, ग़ज़ल, आलेख आदि प्रकाशित ।आकाश वाणी, रोहतक से कविता-कहानियों का प्रसारण तथा कवि- गोष्ठियों एवं वार्ताओं में सहभागिता ।
प्रकाशित कृतियों में ‘चक्रव्यूह ‘,’सिर्फ अपने लिए ‘ एवं ‘एक मोर्चा और ‘ (कहानी-संग्रह), ‘शांकर वेदान्त एवं हरियाणा का सन्त साहित्य ‘ (आलोचना), ‘सम्वेदना के स्वर ‘ (कविता-संग्रह) तथा हरियाणा साहित्य अकादमी सहित विभिन्न संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित । हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता (1983) में ‘ रिश्ता ‘ कहानी प्रथम पुरस्कृत इसके अतिरिक्त अनेक प्रतियोगिताओं में कई कहानियाँ पुरस्कृत । 2009-10 में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा ‘ सिर्फ अपने लिए ‘ श्रेष्ठ कृति के रूप में पुरस्कृत ।अनेक साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित ।

सम्पर्क : 16- बी, सुजान सिंह पार्क, सोनीपत
मोबाइल : 9466348348

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