आपके दीदार का हिस्सा बना हूँ आजकल ।

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आपके दीदार का हिस्सा बना हूँ आजकल ।
लोग कहते हैं मुझे पागल हुआ हूँ आजकल ।।

जिंदगी के ख्वाब सारे हैं अधूरे आज भी ।
मौन हूँ लेकिन नहीं उनसे खफा हूँ आजकल ।।

आजकल तनहाइयाँ डसने लगीं है देख लो ।
ख्वाब में भी मैं उसे ही सोचता हूं आजकल ।।

खो गईं अठखेलियाँ भी सब समय के साथ में ।
देख लो उसकी खुशी का सिलसिला हूँ आजकल ।।

दीप रोशन कर रहा दहलीज पर अर्णव सदा ।
अब तमस को मैं मिटाने को चला हूँ आजकल

डॉ अरुण कुमार श्रीवास्तव अर्णव

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