सुनो जवाहर!!बालदिवस की हार्दिक बधाई

0
32

1*बेचारा सा बाल-संसार..

सुनो जवाहर..जिनको तुमने
जन्मदिवस सौंपा था..
उनके कोमल हाथों ने
ही वक्त का बोझ उठाया..

जिनको सुर्ख गुलाब समझकर..
तुमने कोट पे टांगा…
उनको तेरे देश वालों ने
मिट्टी में ही मिलाया..

देख जवाहर बाल दिवस पे
बच्चों की मजबूरी
जीने की वह भीख मांगते
करते बाल-मजदूरी
ऊंच-नीच और जाति-धर्म का
माथे तिलक लगाया
सुनो जवाहर तेरे देश ने
कैसा नाम कमाया

तन से नँगे पीली आंखे
कूड़ कबाड़ टटोलें
कंधे पर लटका कर बोरा
कैसे पुस्तक खोलें ??
इनके हाथ देश तेरा ये
पुस्तक थमा ना पाया
देख जवाहर ,सपना तेरा
कैसा रंग है लाया

छोटी सी वो मुन्नी
मां के संग रोज जाती है..
छोटे मैलेे हाथ है लेकिन
पोछ साफ लगाती है
बुझी-बुझी सी आंखें उसकी
फीकी सी मुस्कान
देख जवाहर वो न जाने
क्या होते अरमान
गाली मिली या भूखी नज़रें
मुन्नी का सरमाया
निर्धनता में पली बेटियां
आह ! क्या इन्होंने पाया

ये कैसे हैं बाल-दिवस
जो महज़ समागम करवाते
रटे-रटाए जहां पे तोते
झूठे नगमे गाते
हर दिन बाल-दिवस गर हो तो
देश प्राण पा जाए…
उस दिन देश का एक एक बच्चा
गुरुकुल आंगन जाए..
उठो ! हिंद को चाहने वालो
करो जारी फरमान
तभी देश का हर एक बच्चा
पाएगा सम्मान

 

2*बोलो..ये सच है ना??

बचपन गर बोझ बन जाए
तो..कद बौना रह जाता है
वजूद सहम उठता है..
और.. किसी झौंपड़ पट्टी में मुंह छिपाता है..
और फिर सिसकती रातों में
या तो अपराध जन्म लेता है
या खौफ खून में रमता है..
देश और समाज की अंतड़ियों में
गुरबत का मवाद जमता हैं…
जिसकी आगोश में समाकर असंख्य जीवन मिट जाते हैं..
या खुदाया… पता नही
हम ये कैसे बाल दिवस मनाते हैं…”राज”

राजकुमार राज

Loading...
SHARE
Previous articleबचपन में जाना चाहती हूँ !! (बाल दिवस विशेष)
Next articleचप्पल (लघुकथा )by Dr.Purnima Rai
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here