बचपन में जाना चाहती हूँ !! (बाल दिवस विशेष)

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बचपन में जाना चाहती हूँ

समय की धारा पीछे लाना चाहती हूँ,
मै फिर से बचपन मेंं जाना चाहती हूँ।

रंग बिरंगी तितली के पीछे पीछे मै,
उछल-उछल कर फिर मँडराना चाहती हूँ।
मैं फिर से….

गाँव के तालाबो मे मछली रानी बनकर,
छप छप करके खूब नहाना चाहती हूँ..
मैं फिर से..

बागों मे आमो की डाली ऊपर बैठी
कोयल के संग कू कू गाना चाहती हूँ..
मै फिर से..

विद्यालय मे सहपाठी के संग मिलकरके,
बेबाकी से मौज उड़ाना चाहती हूँ…
मै फिर से…

मित्रो का वो भोलापन मिल जाय अगर तो
दौड़ के उनको गले लगाना चाहती हूँ…
मै फिर से…

सोंधी मिट्टी की खुशबू मे लिपट लिपट के,
अरमानो के धूल उड़ाना चाहती हूँ…
मै फिर से…

काँटों पे चलते चलते थक गई मैं “जूही”
बचपन के आगोश में सोना चाहती हूँ…
मैं फिर से…..

समय की धारा पीछे लाना चाहती हूँ..
मैं फिर से बचपन मे जाना चाहती हूँ…

सुधा कुमारी ‘जूही’
(विशाखापट्नम)
मेरे मन के बच्चा की ओर से सभी के मन के बच्चे को बालदिवस की शुभकामनाएं 🌹

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