गुनाहगार _ लघुकथा (कमलेश भारतीय )

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गुनाहगार
कमलेश भारतीय

रात देर से आए थे , इसलिए सुबह नींद भी देर से खुली । तभी ध्यान आया कि कामवाली नहीं आई ।शुक्र है उसने अपना फोन नम्बर दे रखा है । फोन लगाया ।
उसका पति बोला कि रीटा बीमार है । काम पर आ नहीं सकती ।
पता नहीं कैसे पारा चढ गया- कयों नहीं आ सकती ? सारा घर बिखरा पडा है । कपडे धुलवाने हैं । हम क्या करें ?
कामवाली के पति बोला – कहा न साहब कि बीमार है । आ नहीं सकती । दवा लेकर लेटी हुई है । बात भी नहीं कर सकती ।
– हम तीन दिन बाद आए । पहले ही छुट्टियां दे दीं । अब काम वाले दिनों में भी छुट्टी करेगी तो कैसे चलेगा ?
– क्या उसे बीमार होवे का हक भी नहीं , साहब ? बीमारी क्या छुट्टियों का हिसाब लगा करे आयेगी ?
– हम कुछ नहीं जानते । कोई इंतजाम करो ।
– ठीक है, साहब । मेरे बच्चे काम करने आ जाते हैं ।
कुछ समय बाद स्कूल यूनिफार्म में दो छोटे बच्चे आ गये । फटाफट क्रिकेट की तरह काम करने लगे । छोटी बच्ची ने बर्तन मांजे । बडे भाई ने झाड़ू लगाया । काम खत्म कर पूछा- अब जायें , साहब ?
मैंने पूछा – पहले भी कहीं काम करने गये हो ?
बच्चों ने सहम कर कहा- नहीं , साहब । मां ने दर्द से कराहते कहा था- जाओ , काम करा आओ । नहीं तो य। घर छूट जायेगा
मैं शर्मिंदा हो गया । कितनी बार बाल श्रमिकों पर रिपोर्ट्स लिखीं । आज कितना बडा गुनाह करा डाला । मैंने ही अपनी आंखों के सामने बाल श्रमिकों को जन्म दिया ? इससे बडा गुनाह क्या हो सकता है ? अपनी आत्मा पर इसका बोझ कब तक उठाऊंगा ? गुनाह तो बहुत बडा है ।

संपर्क – 1034 बी , अर्बन एस्टेट 2 , हिसार 125005 हरियाणा ।
मोबाइल 9416047075

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