एक उम्र गुज़र जाती है by Dr.Purnima Rai

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एक उम्र गुज़र जाती है by Dr.Purnima Rai

ऊँची आवाज़ में
बोलना
दूसरों को
खुद से कम आंकना
यह आज की नहीं
बरसों पुरानी
आदत है जमाने में !
एक उम्र
गुज़र जाती है
किसी को
अपना बनाते-बनाते
और खुद को
समझाते-समझाते !!
तन्हा रात का दर्द
जब उफान पर हो
अपना कोई होकर भी
अपने पास न हो
वक्त की सूई भी
एहसास से खाली हो
तब आती है याद
उस जमाने की
जो कभी
न तेरा था
और न ही मेरा हो पाया!
बस यूँ ही एक उम्र
गुज़र जाती है
अपने दर्द को छिपाते-छिपाते
तन्हाइयों को सजाते-सजाते!!

डॉ पूर्णिमा राय 7087775713
25/9/18

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