प्रकृति का प्रकोप!!

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प्रकृति का प्रकोप
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उत्तुंग शिखर पर
शिलाएं स्थिर होती हैं
नहीं होता उनमें कोई कम्पन
………………………..
उन पर जमीं मिट्टी
वज्र बन कर
नहीं काँपती ….
………………………
झील, तालाब, नदी
की ढालान पर
खड़े बहुमंजिले फ़्लैट …
……………………….
अपने साथ हुए खिलवाड़ से
प्रकृति क्रुद्ध हो
धारण कर लेती है
विकराल रूप ….
…………………
गगनचुम्बी इमारतें
माचिस की तीलियों
की तरह धराशायी हो
ले लेती हैं जल समाधि …….
……………………
दूर कहीं
पर्वत के शिखर पर
स्थित देवस्थल में जलते
एक नन्हें से दीपक की लौ
नहीं कांपती, नहीं डरती
……….


Dr.Bhoj kumar mukhi
बी के एम /…. 28.08.2018

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