बहन का पैगाम भाई के नाम by Dr.Purnima Rai

0
106

 

1* बहन का पैगाम भाई के नाम
        (रक्षा बंधन गीत)by Dr.Purnima Rai

याद बहुत करती हूँ भैया राखी के दिन आऊँगी।
अपनी गुड़िया रानी को भी सँग अपने मैं लाऊँगी।।

बचपन की जो प्यारी राखी तस्वीरों में दिखती है
प्रेम समर्पण स्नेह डोर से बंधी वो राखी सजती है
काम-धाम निपटाकर सारे राखी लेने जाऊँगी।।

झुरमुट घर में लग जाता था राखी का जब दिन आता
बहना भाई संग देख कर चेहरा सभी का खिल जाता                                लाख बलैयां लेती मैया देख-देख मुस्काऊँगी।।

सूनी खुशियाँ सूनी राखी सारा शहर वीरान लगे
मँहगाई ने लूटी खुशियाँ कैसे मन में ख्वाब जगे
कच्चा धागा बाँधे रिश्ता सबको ही समझाऊँगी।।

आती जब आकाश” पूर्णिमा ” गम के अंधेरे छिप जाते
स्नेह लहर से आंगन महके हँसते मुखड़े ही भाते
राखी बाँधो हँसी-खुशी से सारे ही सुख पाऊँगी।।

2* भाई मेरा सबसे न्यारा
( रक्षाबंधन गीत )by Dr.Purnima Rai

भाई मेरा सबसे न्यारा, मैं उसकी प्यारी बहना।
दूर कभी मत जाना भैया, मुझको बस इतना कहना।।

मात-पिता की सेवा करके,  दुःख सभी तुम दूर करो।
प्रेम स्नेह की दौलत देकर,सुखों से झोली को भरो।
अपने अच्छे कर्मों से तुम , जगत अँधेरे को हरना।।
भैया मेरा सबसे न्यारा,  मैं उसकी प्यारी बहना..।

लक्ष्मण जैसा भाई बनना, जिसने साथ निभाया था।
माँ सीता की खातिर जिसको नहीं राज सुख भाया था
देश-प्रेम का जज्बा रखकर बहनों की रक्षा करना।।
भैया मेरा सबसे न्यारा,मैं उसकी प्यारी बहना…..

स्वार्थ भरे सब रिश्ते नाते, रिश्ता अनुपम भाई का ।
जो रोया था फूट-फूट कर जब था वक़्त विदाई का ।
झर-झर बहते आँसू कहते,सिर पर हाथ सदा रखना।।
भैया मेरा सबसे न्यारा, मैं उसकी प्यारी बहना….

Loading...
SHARE
Previous articleईदुल अज़हा की करोड़ मुबारकबाद
Next articleप्रकृति का प्रकोप!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here