ईदुल अज़हा की करोड़ मुबारकबाद

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ईदुल अज़हा की करोड़ मुबारकबाद।

हम्द’

उससे पोशीदा नहीं हालात जो मा’बूद है।
जानता है वो तेरी हर बात जो मा’बूद है।।
माँग उससे ही ख़ुशी तू ज़िंदगी के वास्ते।
वो बदल देगा तेरे हालात जो मा’बूद है।।

एक हैं उसकी नज़र में शाह नौकर-ओ-फ़क़ीर।
जानता है सबकी वो औक़ात जो मा’बूद है।।

क्या हुआ समझा नहीं जो कोई तेरे दर्द को।
वो समझता है तेरे जज़्बात जो मा’बूद है।।

नेक बन फिर देख तू उसकी बरसती रहमतें।
देगा तुझको वो हसीं सौग़ात जो मा’बूद है।।

हो नहीं सकता कभी रुसवाइयों का सामना।
मान लो बस उसके अहक़ामात जो मा’बूद है।।

दिल की गहराई से या रज़्ज़ाक़ कहकर देख लो।
रिज़्क़ की कर देगा वो बरसात जो मा’बूद है।।

माँग लो आले पयम्बर के वसीले से दुआ।
बख़्श देगा सारे इनआमात जो मा’बूद है।।

बाबे अहलेबैत पर रख दी अक़ीदत से जबीं।
देगा तुमको ख़ुल्द के बाग़ात जो मा’बूद है।।

“यास्मीं”करना नही यादों से उसकी इन्हेराफ़।
दूर कर देगा तेरे सदमात जो मा’बूद है।।

डॉ. यासमीन ख़ान

पोशीदा-गुप्त, माबूद-ईश्वर,
जज़्बात-भावना, रहमतें-कृपा,
सौग़ात-ईनाम,
अहक़ामात- अल्लाह का हुक्म
रज़्ज़ाक़-रोटी देने वाला,
अहलेबैत- मुहम्मद साहब
और उनके घर वाले,
अक़ीदत-विश्वास, ख़ुल्द-जन्नत
इन्हेराफ़- दूरी ,बेफ़िक्री
वसीले — ज़रिया।

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