जीवन यों चलता जाता है!

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जीवन यों चलता जाता है!

कुछ स्वप्नों में ,कुछ कर्मों में !
कुछ कण्टक वाले पंथों में !
काल का रथ भागा जाता है!
जीवन यों चलता जाता है!
बिजली या तूफान डरायेँ!
आयें चाहे लाख बलायें !
विचलित हृदय न होने देना !
लक्ष्य न अपना खोने देना !
दृढ़ संकल्प विजय पाता है!
जीवन यों ..
आने वाले जाते ही हैं !
खिले फूल मुर्झाते ही हैं ?
आने-जाने से क्या डरना !
बस ,कर्तव्य का पालन करना !
उसके घर सबका खाता है!
जीवन यों …
होगा प्रलय ..सृजन भी होगा!
ध्वंस का भी अभिन्दन होगा !
मिट जाना केवल एक भ्रम है !
आवागमन प्रकृति का क्रम है !
पुष्प बीज में ढल जाता है!
जीवन यों चलता जाता है !

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी “शशी “
जी .जी .एच .एस .बाँगीधार
सल्ट ,अल्मोडा (उत्तराखंड )

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