मृत्यु के रूबरू मिलन हुआ कवि जिंदगी का : अटल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि विभिन्न कवि हृदय से फूटे भाव

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(डा पूर्णिमा राय,पंजाब) एक नेक बंदगी

मृत्यु के रूबरू
मिलन हुआ
कवि जिंदगी का
अटल जी के नाम से ही
मुस्कुरायेगी
चिर परिचित जहान में
एक नेक बंदगी!!

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नमन एक संत को

आज संस्कार नही..एक हवन होगा
क्योंकि..देवों के शरीर जलते नही
ज्योति बनकर जगमगाते हैं..
आज अग्नि की लपटों में दुर्गा के दर्शन होंगे..
क्योंकि बहुत कम बेटे
गंगापुत्र..भीष्म सा फ़र्ज़ निभाते हैं…
आज हवा महक उठेगी
क्योंकि…युगों-युगों के बाद
हम सत्य से भरी हुई
कोई प्रतिमा जलाते हैं….
ऐ हिंद की संतानों…थोड़ी आंख नम कर लेना आज…
क्योंकि…अटल जैसे राष्ट्र पिता
खुशकिस्मत देश ही पाते हैं……”राज”

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श्रद्धांजलि..अटल जी को (राज)

काल के कपाल से
मृत्यु के महाजाल से
मर के भी..वो निखर गया
आज मेरे देश का
वो अक्षय वट है गिर गया
कहते है कि…वो नेता था
सतयुग,द्धापर और त्रेता था
कलयुग में सत्य सिखाने वाला
वो अटल सत्य..बिखर गया
आज मेरे देश का
वो अक्षय वट गिर गया…
कलम में उसकी…धार थी
कलम नही तलवार थी
वाणी में अद्धभुत वेग था
चेहरे पे..बला का तेज था
वो अटल सा अजातशत्रु था
सबके दिलों में उतर गया..
लो आज मेरे देश का
वो अक्षय वट गिर गया..
अटल…कहीं गया नही
वो देखो प्रखर बोल रहा
झूठों के किसी बाजार में
बेबाक सत्य तोल रहा…
युवकों के मुख से बोलेगा
सत्यवादियों में कड़केगा
या ज्वाला बनकर क्रोध की
राष्ट्रवादियों में भड़केगा..
फिर कोई अटल आएगा
दिशा नई दिखाएगा…
और काल के कपाल पर
चढ़कर तराना गाएगा….
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डॉ. यासमीन ख़ान 

भला वो कौन है जिसकी शराफ़त दिल पे छाई है।
अटल विश्वास जिसपे सारी दुनिया करती आई है।।
अरे ओ बेख़बर सुन लो बता देती हूँ मैं तुमको।
जहाँ में नाम बस उनका अटल जी वाजपेई है।।

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डॉ .शशि जोशी “शशी सच्चे जननायक ..जनसेवक ..महान आत्मा आद .अटल बिहारी वाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि !अपने हृदय से जो पर पीड़ा पढ़ पाते हैं !
औरों की सेवा में जीवन अर्पित कर जाते हैं !
जनसेवा का लिये “अटल” व्रत जो बढ़ते जाते हैं !
“शशी”देश की खातिर जीवन अर्पित कर जाते हैं ,
ऐसे पुण्य हृदय जगती में कभी -कभी आते हैं !

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 “भारत रत्न अटल (सुशील शर्मा)

अटल मौन देखो हुआ,सन्नाटा सब ओर।
अंतिम यात्रा पर चले,भारत रत्न किशोर।

भारत का सौभाग्य है,मिला रत्न अनमोल।
अटल अमित अविचल सदा,शब्द शलाका बोल।

राजनीति में संत थे,राष्ट्रवाद सिरमौर।
शुचिता से जीवन जिया,बंद हुआ अब शोर।

धूमकेतु साहित्य के,राजनीति के संत।
अटल अचल अविराम थे, मेधा अमित अनंत।

देशप्रेम पहले रहा,बाकी उसके बाद।
जीवन को आहूत कर,किया देश आबाद।

वर्तमान परिपेक्ष्य में,प्रासंगिक है सोच।
राजनीति के आचरण,रहे न मन में मोच।

अंतर व्यथा को चीरकर,कविता लिखी अनेक।
संघर्षों संग रार कर ,संयम अटल विवेक।

अंतिम यात्रा पर चले, दे भारत को आधार।
भारत तेरा ऋणी है,हे श्रद्धा के अवतार।

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दोस्तो आज हमारे शहर पंचकूला में बरसात हो रही है—अटल जी के व्यक्तिव को शत शत नमन (डॉ०प्रतिभा माही)

देखो…
आज हमारे….
माननीय अटल जी की….
विदाई पर…
आसमान भी…
फूट-फूट कर रो रहा है …
चीख चिल्ला रहा है….
गरज रहा है…
और…
उनके व्यक्तिव का…
गुण गान कर रहा है….
अपने वियोग को—
दर्शा रहा है…
कह रहा है देखो….
भारत रत्न…
अलविदा कह ….
अपनी मधुर यादें …
हम सभी के दिलों में छोड़कर…
जा रहा है…
जा रहा है…
जा रहा है…

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संकलित डा पूर्णिमा राय 7087775713

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