डंका बजा के बोलिये सारे जहान से!

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ग़ज़ल
डंका बजा के बोलिये सारे जहान से।
उगले न ज़ह्र कोई भी अपनी ज़बान से।।

दुश्मन नज़र लगाते रहें कितनी भी मगर
लहराएगा तिरंगा ये अपनी ही शान से।।

लालच में आके ग़ैर का मत साथ दीजिए।
खेले न कोई अपने बुज़ुर्गों की आन से।।

हुब्बे वतन का जोश न हो जिसके खून में।
उन सबको दूर रखिये दिलों के मकान से।।

तक़रीर नफ़रतों की जो करता मिले यहां।
उसको उतार दीजिये जाकर मचान से।।

उनको सबक़ सिखाना ज़रूरी है दोस्तों।
पलटी जो मार लेते हैं अपने बयान से।।

समझाए जाके कोई ये नेता के भक्त को।
होगा भला न देश का झूठे बखान से।।

नफ़रत को दूर रखिये हिदायत ये दी गयी।
गीता से जाके पूछ लो या फिर क़ुरआन से।।

नफ़रत की इस वतन में उगाते जो खेतियाँ।
उनको निकाल फेंकिये हिन्दोस्तान से।।

हम “यास्मीन”आ गये जिस दिन भी मूड में।
दुश्मन हमारे देश के जाएँगे जान से।।


डॉ. यासमीन ख़ान
हुब्बे वतन-देशभक्ति,हिदायत-निर्देश,

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