नैन बुझे से हाइकु Dr.Purnima Rai 

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नैन बुझे से हाइकु Dr.Purnima Rai 

गर्म हवायें
भीतर से जलते
हरेक दिल!!

आस में डूबा
हंसों का जोड़ा आज
बिछुड़े हाथ!!

मिलन बेला
भिगोती तन-मन
स्थूल रूप से!!

बरखा बूँदें
ऊष्णता से भरी हैं
तपती देह!!

सौंधी महक
मृगतृष्णा मानिंद
ढूँढती बूँदें!!

रेत के कण
बिखरे हवाओं में
नैन बुझे से!!


डॉ.पूर्णिमा राय
drpurnima01.dpr@gmail.com
www.achintsahitya.com

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1 COMMENT

  1. डा.पूर्णिमा राय बहमुखी प्रतिभा की धनी हैं।उनके ये हाइकु प्रीतिकर बन पड़े हैं।उन्हें हार्दिक बधाई!

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