बेदर्दी अब आओ ना!!

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ग़ज़ल

बेदर्दी अब आओ ना।
इतना भी तड़पाओ ना।।

सर्द हुआ जाता है मन।
प्रेम अगन बरसाओ ना।।

कितने राजा रंक हुए।
यूँ धन पर इतराओ ना।।

आ जाओ अब आ जाओ।
करके बात रिझाओ ना।।

बातें सब मैं मानूँगी।
थोड़ा ज़िद पर आओ ना।।

किसकी क़िस्मत बदले कब।
इतना भी इतराओ ना।।

दिल पर भारी पड़ता है।
अब तो खेल खिलाओ ना।।

चाँद वहीं पे रहने दो।
तारे लेकर आओ ना।।

खो जाऊँगी देखे बिन।
इतना भी तरसाओ ना।।

क्यों आने से डरती हैं ।
नींदों को समझाओ ना।।

नफ़रत के इस जंगल में।
गीत वफ़ा के गाओ ना।।

आकर मेरे जीवन को।
चंदन सा महकाओ ना।।

“यास्मीन”कि दुनिया में।
बादल बनकर छाओ ना।।


डॉ. यासमीन ख़ान

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