वक़्त की कैसी अजब ये मार है !

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वक़्त की कैसी अजब ये मार है !(गीत)

वक़्त की कैसी अजब ये मार है !
फूल की मासूमियत बीमार है !

ओढ़कर नकली मुखौटे आ गये !
खोखले रिश्ते शहर में छा गये !
आस्था का रंग धूमिल पड गया !

नेह बिकने के लिये तैयार है !
फूल की मासूमियत बीमार है !

आधुनिकता का नया अंदाज़ है !
कागजी फूलों का घर में राज है !
क्या करे ??? सबको रिझाये किस तरह ??

सत्य की खुशबू बड़ी लाचार है !
फूल की मासूमियत बीमार है !

क्या ख़बर हो मखमली अहसास की !
हो गयी घायल ऋतु ,मधुमास की !
हर तरफ़ है चोट ..टूटन और घुटन !

प्यार का बिगडा हुआ आकार है !
फूल की मासूमियत बीमार है !

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी “शशी ”
एल .टी .हिंदी एवम प्रभारी प्रधा.
कन्या हाई .बाँगीधार ,सल्ट ,अल्मोडा (उत्तराखंड )

 

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