साहित्यकार की वसीयत !!

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साहित्यकार की वसीयत

मेरे शव पर
एक भी फूल न चढे
ध्यान रखना मेरे मित्र
मैंने फूलों में नहीं
कांटों की चुभन में
बिताया सारा जीवन ।
थैलियां मेरे काम की नहीं
न भेंट करना मेरी पीढियों को ।
न कोई खिडकी से झांक कर कहे –
कोई स्कूल मास्टर मर गया है ।
मेरे मरने पर कोई शोक संदेश
या श्रद्धांजलि सभा मत रखना ।
मैं कलम का सिपाही
समाज के हर मोर्चे पर अकेला ही खडा रहा ।
अच्छा कुछ न कुछ करना ही चाहते हो ?
तो मेरे होरी कोई
मेरी निर्मला को
मेरे स्थान पर
जीवनदान देना ।


-कमलेश भारतीय
9416047075

 

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