कमलेश भारतीय को सृजन साहित्य सम्मान: एक रिपोर्ट

1
71

कमलेश भारतीय को सृजन साहित्य सम्मान……..

श्रीगंगानगर। वरिष्ठ लघुथाकार कमलेश भारतीय (हिसार) ने कहा है कि लघुकथाकारों के मठ बनना ही लघुकथा के लिए नुकसानदायक साबित हुआ है। जब तक मठ नहीं थे, तब तक लघुकथा बेहतर से बेहतरीन स्थिति में थी।
वे रविवार को तनिष्क सभागार में सृजन सेवा संस्थान की ओर से आयोजित ‘लेखक से मिलिएÓ कायज़्क्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह विभिन्न प्रकार के वादों और विमशोज़्ं ने साहित्य को बांटकर साहित्य का नुकसान किया है, उसी तरह लघुकथाकारों के मठ बन जाने से लघुकथा का वह विकास नहीं हो पाया है, जिसकी वह हकदार थी।

भारतीय ने माना कि बेशक पुस्तकों को अब पहले जितने पाठक नहीं मिल पा रहे हैं, लेकिन अच्छे साहित्य के पाठक आज भी है। लोग पुस्तक खरीद कर भी पढ़ते हैं लेकिन बात तो यह है कि अच्छा लिखा कितना जा रहा है। उन्होंने माना कि लेखक दुनिया भर के शोषण पर लिखता है लेकिन जब खुद की पुस्तक छपवाने का समय आता है तो वह प्रकाशक के सामने खुद हाजिर हो जाता है शोषण करवाने के लिए कि भाई ले मेरी पांडुलिपि तू छाप और कमा। मुझे तो दस प्रतियां दे देना। यही काफी है।
नए लेखकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छा लेखक बनना है तो अच्छा साहित्य पढ़ें। अच्छा पढ़कर ही हम लिखना सीखते हैं, हमें प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस मौके पर अपनी कुछ लघुकथाएं, कविताएं और हिंदी साहित्य पर एक आलेख भी पढ़ा।

कायज़्क्रम के विशिष्ट अतिथि एडवोकेट लक्ष्मीनारायण सहगल ने कहा कि पढऩे से अभिव्यक्ति की धार मजबूत होती है। बात में वजन आता है। वकालत में रहते हुए एक अच्छे पाठक होने का उन्हें बहुत फायदा हुआ है। कायज़्क्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ व्यंग्यकार मासूम गंगानगरी ने माना कि क्षेत्र में बेहतर साहित्यिक माहौल बन रहा है। इससे पहले सृजन के सचिव कृष्ण कुमार आशु ने भारतीय का परिचय दिया। अध्यक्ष अरुण शहैरिया ताइर ने आभार जताया। संचालन कायज़्क्रम संयोजक संदेश त्यागी ने किया।
………भारतीय को सृजन साहित्य सम्मान……..

इस मौके पर कमलेश भारतीय को सृजन साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें समाजसेवी विजय गोयल, साहित्यकार गोविंद शमाज़्, मासूम गंगानगरी, लक्ष्मीनारायण सहगल एवं सृजन के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ताइर ने शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक तथा पुस्तकें भेंट करके सम्मानित किया।

Loading...
SHARE
Previous articleहर शख़्स शै मेंं शुमार हो गया!!
Next articleजनसमर्थन अभियान के तहत केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री से भेंट 
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here