आखरखोर !!

1
142

आखरखोर (ओमीश परुथी)

शब्द
कभी ब्रह्म था!
अनहद नाद था
मां शारदा का प्रसाद था
सूर की चदरिया सा पावन
भवभूति की करुणा का सावन
वाल्मीकि की हृदय विदारक
वेदना का त्राण था।
सम्राटों की सच्ची कसौटी
दरिद्र का स्वाभिमान था।
रघुकुल में वचन पहले
और पीछे प्राण था
दिए त्याग जो दशरथ ने
पर अपने शब्दशिशु नहीं किए अनाथ
झुक गया उनके समक्ष
इतिहास का भी माथ।

शत शत कवियों ने
गायी उनकी गाथ
और पाके उनका साथ
शब्द बहुरंगी बहुगंधी फूल हो गए।
कल
वे चढ़ गए थे सूली पर
अपने शब्दों की खातिर
आज हम रीढ़विहीन
अपने ही शब्दों को
सूली पर चढ़ाते हैं।
महत्त्वाकांक्षा की मीनार से
उल्टा लटकाते हैं
नोच डालते हैं उन्हें
कुटिलता, कदाचार से
ईर्ष्या और अहंकार से।

यहाँ वहाँ हर कहीं
बस यही मंजर है
शब्द किसी के हाथ में पकड़ा पत्थर तो

किसी के घीसे में छिपा खंजर है
किसी की मक्कारी मढ़ने की मांड है
विषैले मन पर चढी खांड है।
मंचों पर बनाए जाते वे भांड हैं।

नेता
जिन शब्दों को उच्चारते नहीं अघाते
बाद में अपना मानने से भी कर देते हैं इनकार
स्टुडियो के कैमरे भी होते हैं शर्मसार।
भूखे आखरखोर, शातिर शब्दघाती
काली करके रख दी रघुकुल थाती।

बस्ती हो या बाजार
तर्पण हो या त्योहार
संसद का अखाड़ा
संगोष्ठी या सभागार
हर कहीं शब्द बेचारे
निर्वस्त्र किए जाते हैं हररोज़
बिना अस्मिता ,बिना ओज
रहते हैं भटकते हवाओं में
असामयिक गुजर गए प्राणियों की
आत्माओं की तरह।।

आज जितना बड़ा किसी का पद है
ऊँची जिसकी जितनी सवारी है
उतना ही शातिर वह
शब्दों का व्यापारी है।
शब्दों से खेलने में
जो जितना दक्ष है,धुरंधर है
वही धरमराज है, वही हरीश्चंदर है।


.Mo .9813203955

Loading...
SHARE
Previous articleकुछ ऐसे लोग भी होते हैं (संगीतकार मदनमोहन के जन्मदिन पर विशेष)
Next articleउऋण नहीं( लघुकथा)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here