शुभमाल छंद :करो न कुतर्क

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*शुभमाल छंद*
शिल्प:-
[जगण जगण]
(१२१ १२१)
{दो-दो चरण समतुकांत,
६ वर्ण प्रति चरण}

पिता सुविचार।
भरे उर प्यार।
मिले अधिकार।
बने सरदार॥(१)

सिया पति राम।
सजे उर श्याम॥
मनोहर गान।
लगा सुर ध्यान॥(२)

प्रचार प्रसार।
प्रभाव अपार॥
प्रकाश प्रभात।
हरे तम रात॥(३)

दिवाकर तुल्य।
मनीष अतुल्य॥
वशिष्ठ समान।
बढ़ा मुनि ज्ञान॥(૪)

करो न कुतर्क।
पड़े फिर फर्क॥
धरो उर प्यार।
बढ़ा पग यार॥(५)

सजा नव द्वार।
कपाल सुधार॥
विदारक काल।
विनासक चाल॥(६)

राजन-सिंह
C-5/60 B, Street no – 2
Sadatpur ext.
Karawal Nagar
North-East Delhi
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Mob – 7909047487
दिल्ली

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