तंत्र और आदमी (कमलेश भारतीय )

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तंत्र और आदमी (कमलेश भारतीय )

सिनेमा हॉल में सुपरहिट फिल्म रिलीज हुई थी । शहर में शोर था कि टिकट ब्लैक में भी मुश्किल से मिल रही है । एडवांस बुकिंग बस दिखावे के लिए है ।
ऐसे में वह अपना परिचय देता हुआ, सिनेमा हाॅल के मैनेजर के कमरे में पहुंचा तो देखा कि वहां टिकटें ही टिकटें थीं । पुलिस के जवान , उस जैसे पत्रकार और यहां तक कि इस उस फलाने ढिमकाने अफसरों के संदेश लेकर टिकटें लेने आए मातहत कर्मचारी भी ।
अब समझ आया कि टिकटें भी अपने भ्रष्ट तंत्र की तरह ही है , जिसे ठीक करने जो भी हमाम में आता है , वह भी नंगा हो जाता है ।


साहित्यकार कमलेश भारतीय

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