कितना कठिन हुआ (गज़ल)

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कितना कठिन हुआ (गज़ल)

खुद को बुद्ध बनाना ,कितना कठिन हुआ !
सरल हृदय हो जाना ,कितना कठिन हुआ !

तन चमकीले हुए और मन रेतीले ,
भीतर फूल खिलाना ,कितना कठिन हुआ !

धीरे -धीरे पत्थर होते शहरों में ,
जीवन को धड़काना कितना कठिन हुआ !

स्वारथ से दूषित होते सम्बन्धों में ,
शुध्द प्रेम को पाना कितना कठिन हुआ !

होड़ लगी है वैभव और प्रदर्शन की ,
ग्लैमर से बच पाना कितना कठिन हुआ !

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी “शशी ”
सल्ट ,अल्मोडा (उत्तराखंड )

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