करो सम्मान नारी का निगाहों में हया रखना!

0
78

 करो सम्मान नारी का निगाहों में हया रखना!

करो सम्मान नारी का निगाहों में हया रखना!
समर्पण भाव को लेकर ज़हन अपना खुला रखना!!

क़लम की धार से चाहे बदल देना सभी मंज़र!
सदाकत जो अलग करती नहीं ऐसी दया रखना!!

तुम्हारे आशियाने को सजाती रात दिन नारी!
मिले समभाव का दर्ज़ा इरादा ये सदा रखना!!

ज़मीनों आसमां मिलकर गुजारिश आज करते हैं!
हरिक अल्फ़ाज़ को अपने जहानत से भरा रखना!!

सदा मिलजुल रहें सारे तमन्ना है यही दिल की !
बने क़िरदार पाक़ीज़ा लबो पे बस दुआ रखना!!

सभी का दिल लुभा लेना जुदा अंदाज़ से अपने!
मुसाफ़िर गीत ग़ज़लों को हमेशा तुम नया रखना!!

धर्मेंद्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”

Loading...
SHARE
Previous articleएक पेड़ का अंतिम वचन!!
Next articleकितना कठिन हुआ (गज़ल)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here