पक्षी भी अब इंसानियत पर उतर आए!!

1
72

 

*विश्व पर्यावरण दिवस*
*******************
पक्षी भी अब
इंसानियत पर उतर आए,
आपस में लड़ने लगे
इक दूजे को लड़ाने लगे,
जंगल कट गए
पेड़ कम पड़ गए
सभी अपनी -अपनी
डाल बुक कराने लगे
शहर से इन्सानी हवा
जंगल की ओर बढ़ने लगी
आरक्षण की बात भी
परवान चढ़ने लगी
माहौल में तब्दीलियां
रंग लाने लगी
पक्षियों को भी
इक बात समझ आने लगी
ऐसा तब हुआ
जब आपाधापी में घोसलें
टूट कर बिखरने लगे
अंडे,चूजे सभी मरने लगे
पेड़ों की बजाय
धरती पर घर हो गया
बयाँ का,कोयल का घोंसला
बारिश में तर हो गया
तब सभी पक्षी
एक झुंड हो गए
ऐसा लगता था
सभी के एक मुण्ड हो गए
प्रस्ताव पास हुआ
इंसान तो जंगल काटना
कम नहीं करेगा
पेड़ ना भी रहें
तो ग़म नहीं करेगा
हमें तो पेड़ ही
इक सहारा है
डाल के बिन
कहाँ गुज़ारा है
अब से हम फलों के बीज
फूलों से पराग चुन लेंगे
इन्हें दूर दूर तक बिखेरेंगे
इस तरह से
पेड़ हम लगाएंगे
जंगल हमारा घर है
हम अपनी जगह घेरेंगे
प्रदूषण के ख़िलाफ
इस तरह जंग जीत पाएंगे
समझेगा अगर इन्सान
तो वो भी पेड़ लगाएंगे
वो भी पेड़ लगाएंगे
वो भी पेड़ लगाएंगे।

•अरुण आशरी,जीन्द।•
दूरभाष न: 7206502160

Loading...
SHARE
Previous articleमित्रता ( विश्व पर्यावरण दिवस )विशेष by Dr.Purnima Rai
Next articleएक पेड़ का अंतिम वचन!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here