भीग गई वसुधा (चोका )by Dr.Purnima Rai

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भीग गई वसुधा (चोका )

हवा के झोंके
छू रहे तन-मन
निश्छल यादें
बरबस उतरी
मन के द्वार
अखियों का पैमाना
ज्यों ही छलका
बादलों से टपकी
बूँद-बूँद से
भीग गई वसुधा
विरहाग्नि में
मूसलाधार वर्षा
हृदय नभ
हो गया आह्लादित
प्रिय मिलन
अनोखा प्रकृति का
भीनी सुगंध
आने लगी धरा से
पुलकित अंगागी!!

Dr.Purnima Rai,Asr

डॉ.पूर्णिमा राय, अमृतसर

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